रांची:- पारस हॉस्पिटल रांची में हृदय रोग के आधुनिक उपचार में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई है। अस्पताल में अब बिना लीड पेसमेकर प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध हो गई है। यह नवीन तकनीक पारंपरिक पेसमेकर की तुलना में ज्यादा सुरक्षित, सुविधाजनक और शरीर पर न्यूनतम प्रभाव डालने वाली मानी जाती है।
बिना लीड पेसमेकर लगभग एक कैप्सूल जितना छोटा होता है और इसे बिना किसी चीरे के, कैथेटर की सहायता से सीधे हृदय के अंदर लगाया जाता है। इसमें किसी प्रकार की तार (लीड) की आवश्यकता नहीं होती, जिससे इंफेक्शन, लीड फेल या छाती पर बाहरी उपकरण की समस्या नहीं रहती। यह प्रत्यारोपण कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. महेश कुशवाहा और उनकी विशेषज्ञ टीम द्वारा किया गया। डॉ. महेश कुशवाहा ने कहा कि इस तकनीक से मरीज को बेहद कम दर्द होता है और रिकवरी भी बहुत जल्दी होती है। यह तकनीक उन मरीजों के लिए खासतौर पर लाभकारी है जिनकी हृदय गति बहुत धीमी होती है या जिन्हें बार-बार चक्कर, थकान और बेहोशी की समस्या होती है। बिना लीड पेसमेकर के उपयोग से रिकवरी समय कम होता है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है। पूर्वी भारत में सीमित हॉस्पिटलों में नया पेसमेकर बिना लीड लगाया जा रहा है। इनमें पारस हॉस्पिटल रांची भी शामिल है। अभी तक 10 से अधिक मरीजों को बिना लीड पेसमेकर लगाया जा चुका है।
पारस हॉस्पिटल रांची के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ नीतेश कुमार ने कहा कि इस नई सुविधा से रांची और झारखंड के आसपास के मरीजों को अब बड़े महानगरों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अत्याधुनिक उपकरण व अनुभवी चिकित्सकों की टीम की बदौलत जटिल हृदय उपचार अब यहीं संभव है। अस्पताल आने वाले समय में हृदय रोग से जुड़ी और भी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है, ताकि मरीजों को सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकें।
