आकाश रंजन (संवाददाता)
लातेहार :- झारखंड के लातेहार जिले में स्थित नेतरहाट को ‘छोटानागपुर की रानी’ कहा जाता है। घने देवदार के जंगल, लगातार बदलते मौसम की चादर, पहाड़ियों का उतार-चढ़ाव, झरनों की मनमोहक ध्वनि, ठंडी हवा की ताजगी और आसमान से उतरती बादल सब मिलकर नेतरहाट को एक ऐसा अनोखा स्थल बनाते हैं, जहां पहुंचते ही मन प्रकृति की गोद में समा जाता है। झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 150 किलोमीटर दूर यह स्थान उन यात्रियों के लिए स्वर्ग है जो भीड़ भाड़ से दूर एक शांत, सौम्य और प्राकृतिक वातावरण में समय बिताना चाहते हैं। नेतरहाट की यादियों में ली गयी तस्वीरें खुद-ब- खुद दिखा देती हैं कि यह जगह क्यों इतनी मशहूर है। ऊंचे देवदार के पेड़, बादलों से ढंकी घाटियां, पहाड़ियों पर उगता सूरज और डूबते सूरज का सुनहरा नजारा यहां आने वाले हर व्यक्ति के दिल पर छाप छोड़ देता है। यहां के दो प्रमुख झरने ऊपरी घाघरी और निचली घाघरी पर्यटकों को खासतौर पर आकर्षित करते हैं। इन झरनों के पास झरनों का शोर, चारों ओर फैला घना जंगल और पत्थरों के ऊपर गिरते पानी की चमक देखने लायक होती है।
मैग्नोलिया और चरवाहे की अमर प्रेम कहानी
नेतरहाट की सबसे चर्चित और भावनात्मक ऐतिहासिक कहानी है-मैग्नोलिया नाम की स्थानीय आदिवासी चरवाहे के प्रेम की। यह कहानी ब्रिटिश शासन काल की है, जब नेतरहाट अंग्रेज अधिकारियों का पसंदीदा विश्राम स्थल हुआ करता था। कहा जाता है कि मैग्नोलिया, जो एक अंग्रेज अधिकारी की बेटी थी, अक्सर नेतरहाट की वादियों में घूमने जाती थी। वहीं एक दिन उसने पहाड़ी पर बैठकर बांसुरी बजाते एक आदिवासी चरवाहे को देखा। उसकी बांसुरी की धुन इतनी मधुर थी कि मैग्नोलिया उस संगीत की और खिंची चली आयी। धीरे-धीरे दोनों की मुलाकातें बढ़ने लगीं और मैग्नोलिया हर शाम सनसेट प्वॉइंट पर उससे मिलने पहुंचने लगी। उन मुलाकातों ने दोस्ती को प्यार में बदल दिया।
लेकिन यह प्रेम अंग्रेज अधिकारी को मंजूर नहीं था। एक अंग्रेज लड़की और एक स्थानीय आदिवासी युवक का रिश्ता समाज के लिए उस समय अस्वीकार्य माना जाता था। जब चरवाहे ने मैग्नोलिया से दूर जाने से इनकार किया, तो अधिकारी ने गुस्से में उसकी हत्या करवाने का आदेश दे दिया। बांसुरी की धुन जो कभी वादियों में गूंजती थी, अचानक हमेशा के लिए खामोश हो गयी। चरवाहे की मौत की खबर सुनकर मैग्नोलिया टूट गयी। वह उसी स्थान पर गयी, जहां वह रोज सूरज ढलने के साथ अपने प्रेमी से मिलती थी और अपने घोड़े संहित पहाड़ से छलांग लगा दी। यहीं आज मैग्नोलिया प्वाइंट नामक स्थान है, जहां उनकी प्रतिमाएं लगी हैं और लोग आज भी इस अमर प्रेम कथा को याद करने आते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पूरे माहौल में एक जादुई शांति छा जाती है, मानो वादियां अब भी उस बांसुरी की करुण धुन सुनाती हों।
प्राकृतिक पर्यटन का सबसे खूबसूरत ठिकाना नेतरहाट न केवल अपनी प्रेम
कहानी और इतिहास के लिए बल्कि अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है। यह छोटानागपुर पठार का सबसे
ऊंचा क्षेत्र है और यहां का मौसम साल भर सुहावना रहता है।
सनराइज और सनसेट प्वाइंट
नेतरहाट का सबसे बड़ा आकर्षण है यहाँ का सूर्योदय और सूर्यास्त। मैग्नोलिया प्वाइंट पर डूबते सूरज का दृश्य ऐसा लगता है जैसे सुनहरी किरणें पहाड़ियों पर नजाकत से गिर रही हों। सुबह की धुंध, हवा की ताजगी और उगाते सूरज की चमक दिल में बस ऊपरी और निचली घाघरी जलप्रपात घने जंगलों से घिरे ये इझरने प्राकृतिक सौंदर्य का अनमोल खजाना हैं। इनमें गिरते पानी की आवाज और आसपास की पर्यटन को और भी समृद्ध बनाती है ।हरियाली मन को शांत कर देती है।
आदिवासी संस्कृति की पहचान
यह क्षेत्र बिरहोर, उरांव और बिरजिया जैसी जनजातियों का निवास स्थान है। उनकी जीवनशैली, पारंपरिक संगीत, लोककथाएं और संरकृति यहां के
नेतरहाट आवासीय विद्यालय प्रतिभा का केंद्र
नेतरहाट की पहचान केवल प्राकृतिक सुंदरता या प्रेम कहानी तक सीमित नहीं है। यहां स्थित नेतरहाट आवासीय विद्यालय देश
कैसे पहुंचें और कब जायें
के सबसे प्रतिष्ठित गुरुकुल-शैली के शिक्षण संस्थानों में से एक है। यहां प्रवेश पूर्ण रूप से योग्यता आधारित होता है और दशकों से इस संस्थान ने आइएएस, आइपीएस और अनेक प्रतिष्ठित अधिकारी तैयार किये हैं। विद्यालय की शिक्षा प्रणाली अनुशासन, समर्पण, कौशल और सर्वांगीण विकास के लिए जानी जाती है। इतिहास गवाह है कि देश-विदेश में प्रतिष्ठित पदों पर बैठे कई अधिकारी नेतरहाट विद्यालय की देन हैं।
रांची और डाल्टनगंज से नेतरहाट पहुंचना बेहद आसान है। रांची से दूरीः लगभग 150 किमी सड़क मार्ग खूबसूरत घुमावदार पहाड़ी सड़कों से होकर जाता है। दिसंबर और जनवरी इस दौरान मौसम ठंडा और साफ रहता है, जिससे सूर्योदय सूर्यास्त और झरनों के नजारे बेहद खूबसूरत दिखते हैं।
ऐतिहासिक धरोहर शैले हाउस
नेतरहाट का एक और महत्वपूर्ण आकर्षण है-शैले हाउस, एक पुराना ब्रिटिश बंगला। ब्रिटिश शासन काल के दौरान यह बंगला अंग्रेज अधिकारियों का पसंदीदा ठहराव स्थल हुआ करता था। यह भवन आज भी उस दौर की वास्तुकला, इतिहास और झारखंड की प्राचीन विरासत को अपने भीतर समेटे हुए खड़ा है। इसकी दीवारें जैसे उस समय की कहानियां सुनाती हैं-एक ऐसा समय जब अंग्रेज अधिकारी यहां की वादियों की खूबसूरती से प्रभावित होकर महीनों ठहर जाया करते थे।
नेचर हार्ट से नेतरहाट तक
प्राचीन समय में इस क्षेत्र को नेतरहातु कहा जाता था, जिसका जंगलों वाला क्षेत्र। बाद में अग्रेजों ने इसे चर हार्ट कहा, क्योंकि यह प्रकृति का दिल जैसा लगता था। फिर धीरे धीरे उच्चारण बदलते बदलते यह नेतरहाट बन गया। यह नाम अपने आप में ही इस क्षेत्र की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
नेतरहाट जंगल सफारी का शुभारंभ
नेतरहाट में हाल ही में जंगल सफारी का भी शुभारंभ किया गया है, जिसने पर्यटन को नयी दिशा दे दी है।
सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए सफारी का किराया 300 रुपये तय किया गया है। यह सफारी पर्यटकों को जंगलों की गहराई में ले जाती हैं, जहां हिरण, जंगली खरगोश, पक्षियों की रंग-बिरंगी प्रजातियां और प्राकृतिक पेड़-पौधों की अनोखी दुनिया का नजदीक से आनंद उठा सकते हैं।
जंगल की खामोशी, पत्तों की सरसराहट, दूर कहीं से आती पक्षियों की आवाज, और पुरानी कथाओं में बरसी पहाड़ी हवाएं-ये सब मिलकर एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करती हैं।
नेतरहाट केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, एक अनुभव है
प्रकृति का सौदर्य, इतिहास की गहराई, प्रेम की अमर कथा, शिक्षा की ऊंचाई, सांस्कृतिक विविधता और जंगलों की जादुई दुनिया। यह सब मिलकर नेतरहाट को झारखंड ही नहीं, पूरे भारत का सबसे अनूठा और यादगार स्थान बनाते हैं।
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