साईं नाथ विश्वविद्यालय में “Recent Advancement in Herbal Medicines in Modern Healthcare System” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ

The Ranchi News
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संवाददाता: रेखा प्रजापति

Ranchi:- *साईं नाथ विश्वविद्यालय, राँची के प्रांगण में आज “Recent Advancement in Herbal Medicines in Modern Healthcare System” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य एवं गरिमामयी शुभारंभ हुआ।* यह राष्ट्रीय सम्मेलन दिनांक 11 एवं 12 फ़रवरी 2026 को प्रातः 10ः00 बजे से विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित किया जा रहा है।

इस सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से पधारे प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, आयुर्वेद विशेषज्ञ, शोधकर्ता, चिकित्सक एवं विद्यार्थी सक्रिय सहभागिता कर रहे हैं। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हर्बल मेडिसिन के क्षेत्र में हो रहे नवीन अनुसंधान, पारंपरिक औषधीय ज्ञान के वैज्ञानिक सत्यापन तथा आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली में इनके प्रभावी उपयोग पर व्यापक विचार-विमर्श करना है।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुई। सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर साईं नाथ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा विश्वविद्यालय का कुलगीत सामूहिक रूप से प्रस्तुत किया गया, जिसने पूरे सभागार को गरिमामयी एवं प्रेरणादायी वातावरण से भर दिया। कुलगीत के माध्यम से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परंपरा, मूल्य, अनुशासन एवं राष्ट्र निर्माण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया।

इसके पश्चात *सम्मेलन के मुख्य संरक्षक प्रो. (डॉ.) एस. पी. अग्रवाल, माननीय कुलपति, साईं नाथ विश्वविद्यालय, राँची ने* उद्घाटन भाषण दिया। अपने संबोधन में कुलपति ने कहा-“भारत हर्बल मेडिसिन और आयुष पद्धति की जननी रहा है। आज पूरी दुनिया प्राकृतिक एवं वैकल्पिक चिकित्सा की ओर आकर्षित हो रही है। ऐसे में हर्बल मेडिसिन को वैज्ञानिक अनुसंधान एवं आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ना समय की मांग है।” उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय शोध, नवाचार और समाजोपयोगी ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए निरंतर ऐसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को प्राथमिकता देता रहेगा।

प्रथम दिवस के दौरान आयोजित विभिन्न सत्रों में आमंत्रित विशिष्ट अतिथि एवं विशेषज्ञ वक्ताओं ने हर्बल औषधियों की प्रभावशीलता, गुणवत्ता नियंत्रण, औषधीय पौधों के संरक्षण, फार्माकोलॉजिकल अध्ययन तथा क्लीनिकल ट्रायल पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

*सम्मेलन के मुख्य अतिथि – श्रीमान् अबुबकर सिद्दीकी पी.- आईएएस, सेक्रेटरी, कृषि, पशुपालन और सहकारिता विभाग, झारखण्ड सरकार ने अपने वक्तव्य में कहा कि* – हर्बल मेडिसिन आज केवल वैकल्पिक चिकित्सा नहीं, बल्कि आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली का एक महत्वपूर्ण सहयोगी बन चुकी है।

उन्होंने कहा कि “हर्बल मेडिसिन आधुनिक चिकित्सा के साथ मिलकर क्रॉनिक एवं लाइफस्टाइल डिजीज जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, हृदय रोग एवं तनाव से संबंधित बीमारियों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।”

श्री सिद्दीकी ने यह भी उल्लेख किया कि भारत, विशेषकर झारखण्ड, औषधीय पौधों की जैव-विविधता से समृद्ध राज्य है। यदि औषधीय खेती, वैज्ञानिक अनुसंधान एवं मूल्य संवर्धन (Value Addition) को बढ़ावा दिया जाए, तो इससे न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूती मिलेगी बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।

*सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि डॉ० सुनिल चन्द्र दुबे, माननीय कुलपति, बिरसा एग्रीकल्चरल विश्वविद्यालय, राँची, झारखण्ड ने अपने संबोधन में कहा कि* हर्बल मेडिसिन का विकास तभी संभव है जब कृषि, विज्ञान एवं चिकित्सा के बीच मजबूत समन्वय स्थापित किया जाए।

डॉ० दुबे ने बताया कि बिरसा एग्रीकल्चरल विश्वविद्यालय औषधीय एवं सुगंधित पौधों पर निरंतर अनुसंधान कर रहा है और किसानों को प्रशिक्षण देकर हर्बल फार्मिंग के लिए प्रेरित कर रहा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विश्वविद्यालयों को पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़कर प्रमाणिक डेटा विकसित करना चाहिए, ताकि हर्बल औषधियों को वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता मिल सके।

*तकनीकी सत्र एवं शोध पत्र प्रस्तुतिकरण-* सम्मेलन के पहले दिन कई तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न विष्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों से आए शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र एवं पोस्टर प्रस्तुत किए। इन सत्रों में आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध एवं आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय पर गहन एवं सार्थक चर्चा हुई।

*विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों में उत्साह-* सम्मेलन के आयोजन से विष्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। प्रतिभागियों ने इसे ज्ञान-वर्धन, शोध-प्रेरणा एवं अकादमिक नेटवर्किंग के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

*कार्यक्रम का प्रथम दिवस अत्यंत सफल एवं प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुआ।* *सम्मेलन का द्वितीय दिवस 12 फ़रवरी 2026 को पैनल चर्चा, उन्नत तकनीकी सत्रों एवं समापन समारोह के साथ आयोजित होगा।*

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