रांची। सरला बिरला विश्वविद्यालय में आज से पाँच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) ऑन मॉडर्न रिसर्च एविडेंसेज़ अलाइनिंग विद इंडियन नॉलेज सिस्टम की शुरुआत हुई। इस कार्यक्रम का आयोजन योगिक साइंसेज़ एवं नेचुरोपैथी विभाग द्वारा विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ़ इंडियन नॉलेज सिस्टम, आईक्यूएसी और आईआईसी के सहयोग से किया जा रहा है।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रो. सरस्वती मिश्रा, पूर्व डीन, रांची विश्वविद्यालय ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि चेतना को शुद्ध किए बिना भारतीय ज्ञान परंपरा को न तो समझा जा सकता है और न ही उस पर चर्चा की जा सकती है। उन्होंने बताया कि हम गुरु-शिष्य परंपरा और गुरुकुल से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक पहुँच गए हैं, लेकिन गुरु के मार्गदर्शन के बिना चेतना का शुद्धिकरण संभव नहीं। भौतिकवादी युग में भारतीय ज्ञान परंपरा हमें इस सत्य की याद दिलाती है।
कुलपति प्रो. सी. जगन्नाथन ने भारतीय ज्ञान परंपरा के तीन मुख्य स्तंभों—परमात्मा, जीवात्मा और चेतना—पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चेतना का शुद्धिकरण आवश्यक है और भारतीय परंपरा इसके मार्ग भी दिखाती है।
डायरेक्टर जनरल प्रो. गोपाल पाठक ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे भारतीय ज्ञान परंपरा की शक्ति और दृष्टि को आत्मसात करें। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) में भी इसका उल्लेख किया गया है और अब हम पश्चिमी प्रभाव से बाहर निकलकर अपनी परंपरा की ओर लौट रहे हैं।
डीन प्रो. नीलीमा पाठक ने भारतीय ज्ञान परंपरा को ज्ञान, विज्ञान, कला, शिल्प और कौशल का अद्वितीय संगम बताया। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों से शोध कार्य में निरंतर सक्रिय रहने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में डॉ. राधा माधव झा ने स्वागत भाषण दिया और डॉ. विश्वजीत ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
