रांची:- एक दौर था जब पश्चिमी शिक्षा और संस्कृति को ही सभ्यता की कसौटी माना जाता था, किंतु बदलते वैश्विक परिदृश्य ने इस धारणा को चुनौती दी है। आज जब दुनिया नैतिक, सामाजिक, मानसिक और पर्यावरणीय संकटों से जूझ रही है, तब प्राच्य और महान भारतीय सभ्यता में निहित प्राचीन ज्ञान, शिक्षा और सांस्कृतिक परंपराओं की प्रासंगिकता एक बार फिर केंद्र में आ गई है। इसी सोच को अकादमिक स्वरूप देते हुए ओड़िशा के कटक स्थित श्री श्री विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक पहल के तहत “फैकल्टी ऑफ ईस्टर्न नॉलेज सिस्टम्स (FEKS)” का शुभारंभ किया।
यह पहल केवल एक नया पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि पूर्वी ज्ञान परंपराओं को आधुनिक, शोध-आधारित और संरचित अकादमिक ढांचे में स्थापित करने का प्रयास है। विशेष उल्लेखनीय तथ्य यह है कि संपूर्ण एशिया महाद्वीप में किसी विश्वविद्यालय द्वारा पहली बार इस प्रकार की समर्पित फैकल्टी की स्थापना की गई है, जो प्राच्य ज्ञान प्रणालियों के अध्ययन, अनुसंधान और समकालीन अनुप्रयोग पर केंद्रित है। यह कदम एक बार फिर यह रेखांकित करता है कि पश्चिमी प्रभुत्व वाली शिक्षा व्यवस्था के बीच भी प्राच्य ज्ञान अपनी प्रासंगिकता और श्रेष्ठता बनाए रखने में सक्षम है।
लोकार्पण अवसर पर मंचासीन गणमान्य अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि आज विश्व जिन जटिल संकटों—चाहे वे नैतिक हों, सामाजिक हों या पर्यावरणीय—का सामना कर रहा है, उनके समाधान के लिए दुनिया को पूर्व की ओर देखने की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्राच्य ज्ञान परंपराएँ केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि वे समग्र और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत कर सकती हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)–2020 के अनुरूप विकसित की गई फैकल्टी ऑफ ईस्टर्न नॉलेज सिस्टम्स का उद्देश्य पूर्वी शिक्षा पद्धतियों को वैश्विक अकादमिक विमर्श से जोड़ना है। इस फैकल्टी के अंतर्गत नीतिशास्त्र, दर्शनशास्त्र, खगोल अथवा ज्योतिष शास्त्र, भारतीय मानवविज्ञान, व्याकरण शास्त्र, शिल्प एवं वास्तु शास्त्र, समग्र स्वास्थ्य तथा नाट्यशास्त्र जैसे आठ प्रमुख प्राचीन भारतीय विषयों को सम्मिलित किया गया है। इन विषयों के माध्यम से ज्ञान को केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक और जीवनोपयोगी दृष्टि से प्रस्तुत करने पर विशेष बल दिया गया है।
यह फैकल्टी विद्यार्थियों को स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रियों के साथ-साथ शोध के क्षेत्र में भी व्यापक अवसर प्रदान करती है। इसके अंतर्गत डॉक्टोरल और पोस्ट-डॉक्टोरल कार्यक्रमों की व्यवस्था की गई है, जिससे प्राच्य ज्ञान पर गंभीर और वैश्विक स्तर का अनुसंधान संभव हो सके।
इस अवसर पर श्री श्री विश्वविद्यालय की कुलाध्यक्षा प्रोफेसर रजिता कुलकर्णी, कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) तेजप्रताप, कुलसचिव प्रोफेसर (डॉ.) अनिल कुमार शर्मा, कार्मिक निदेशक स्वामी सत्यचैतन्य, फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के डीन प्रोफेसर (डॉ.) बिप्लब बिश्वाल तथा नवगठित फैकल्टी ऑफ ईस्टर्न नॉलेज सिस्टम्स के डीन डॉ. भरत दास प्रमुख रूप से मंचासीन थे।
कार्यक्रम के दौरान यह प्रश्न भी केंद्र में रहा कि यह अभिनव पाठ्यक्रम रोजगार और करियर के क्षेत्र में विद्यार्थियों के लिए किस प्रकार सहायक सिद्ध होगा। साथ ही, यह भी चर्चा का विषय रहा कि पश्चिमी शिक्षा पद्धतियों की भीड़ के बीच यह फैकल्टी अपनी विशिष्ट पहचान और अकादमिक अस्तित्व किस प्रकार बनाए रख पाएगी। इन सभी पहलुओं का संतुलित समाधान ही “फैकल्टी ऑफ ईस्टर्न नॉलेज सिस्टम्स” के भविष्य की दिशा और सफलता को निर्धारित करेगा।
