राँची:-साईं नाथ विश्वविद्यालय, राँची के प्रांगण में “Recent Advancement in Herbal Medicines in Modern Healthcare System” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आज द्वितीय एवं अंतिम दिवस गरिमामय वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। द्वितीय दिवस के अवसर पर पैनल चर्चा, उन्नत तकनीकी सत्रों एवं समापन समारोह का आयोजन किया गया।
सम्मेलन के द्वितीय दिवस के समापन सत्र का शुभारंभ गरिमामयी वातावरण में हुआ। इस अवसर पर अतिथियों एवं वक्ताओं ने दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान हुए शोधपरक विमर्श, तकनीकी सत्रों एवं अकादमिक संवाद को अत्यंत सार्थक एवं ज्ञानवर्धक बताया। समापन सत्र में हर्बल मेडिसिन के क्षेत्र में भविष्य की दिशा, नीति-निर्माण, अनुसंधान सहयोग एवं अकादमिक समन्वय पर विशेष रूप से चर्चा की गई।
*सम्मेलन के मुख्य संरक्षक प्रो. (डॉ.) एस. पी. अग्रवाल, माननीय कुलपति, साईं नाथ विश्वविद्यालय, राँची ने समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि-* “हर्बल मेडिसिन भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक धरोहर है, जिसे आधुनिक अनुसंधान एवं तकनीक के साथ जोड़कर ही समाज के व्यापक हित में उपयोग किया जा सकता है।”
उन्होंने कहा कि ऐसे राष्ट्रीय सम्मेलन शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा प्रदान करते हैं तथा विश्वविद्यालय भविष्य में भी इस प्रकार के अकादमिक आयोजनों के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
*समापन सत्र के मुख्य अतिथि- श्री प्रशांत कुमार सिंह, आईपीएस, डीजी वायरलेस, राँची, झारखण्ड ने अपने वक्तव्य में कहा कि-* “हर्बल मेडिसिन आधुनिक चिकित्सा के साथ मिलकर क्रॉनिक एवं लाइफस्टाइल डिजीज के उपचार में प्रभावी और सुरक्षित विकल्प प्रदान कर सकती है।”
उन्होंने कहा कि झारखण्ड औषधीय पौधों की जैव-विविधता से समृद्ध राज्य है और यदि औषधीय पौधों की वैज्ञानिक खेती, अनुसंधान, प्रसंस्करण एवं विपणन को बढ़ावा दिया जाए, तो इससे स्वास्थ्य क्षेत्र के साथ-साथ किसानों की आय एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने विष्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों से सरकारी योजनाओं के साथ समन्वय कर कार्य करने का आह्वान किया।
*सम्मेलन के विषिष्ट अतिथि- श्री अनुज कुमार प्रसाद, सचिव, झारखण्ड राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने अपने संबोधन में कहा कि* हर्बल मेडिसिन के क्षेत्र में सफलता के लिए कृषि, विज्ञान एवं चिकित्सा के बीच सुदृढ़ समन्वय आवश्यक है। “औषधीय पौधों की गुणवत्तापूर्ण खेती, वैज्ञानिक उत्पादन प्रणाली, संरक्षण एवं मानकीकरण के बिना हर्बल मेडिसिन को वैष्विक स्तर पर स्थापित नहीं किया जा सकता।”
*पैनल चर्चा एवं उन्नत तकनीकी सत्र-* द्वितीय दिवस के दौरान आयोजित पैनल चर्चा में हर्बल मेडिसिन के क्लीनिकल वैलिडेशन, गुणवत्ता नियंत्रण, औषधीय पौधों के संरक्षण तथा नीति स्तर पर आवश्यक सुधारों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
इस अवसर पर वक्ताओं एवं प्रतिभागियों ने दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान हुए शोधपरक विमर्श, पैनल चर्चा एवं अकादमिक संवाद को अत्यंत सार्थक एवं ज्ञानवर्धक बताया।
सम्मेलन के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों से आए शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने अपने शोध पत्र एवं पोस्टर प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से हर्बल मेडिसिन के क्षेत्र में नवीन अनुसंधान, वैज्ञानिक निष्कर्ष एवं व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर गहन चर्चा हुई।
इसके पश्चात प्रमाण पत्र वितरण समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों, वक्ताओं एवं सम्मेलन में सक्रिय सहभागिता निभाने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। अतिथियों द्वारा प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया गया तथा उनके शोध कार्यों की सराहना की गई।
*समापन एवं राष्ट्रगान-* समापन समारोह में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों द्वारा राष्ट्रगान सामूहिक रूप से गाया गया, जिसके साथ ही दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का विधिवत एवं गरिमामय समापन हुआ।
