रांची/पटना :- बिहार के पूर्व सांसद एवं बाहुबली नेता आनंद मोहन सिंह ने झारखंड राज्य के गठन को लेकर एक बार फिर विवादित और चर्चित बयान दिया है। झारखंड की राजधानी रांची पहुंचे आनंद मोहन सिंह ने कहा कि झारखंड आज भी एक “अधूरा राज्य” है और इसका निर्माण जिस उद्देश्य और सपने के साथ किया गया था, वह अब तक पूरा नहीं हो सका।
रांची आगमन पर आनंद मोहन सिंह अपने सहयोगियों के साथ पहुंचे, उनके साथ शिवहर की सांसद लवली आनंद भी मौजूद रहीं। रांची की पावन धरती पर उनके आगमन पर सामाजिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया। इस मौके पर समाजसेवी गोपाल शरण सिंह, ललन सिंह, आदर्श कुमार सिंह, यश सिंह परमार, मनीष सिंह, युवा नेता गौरव सिंह और राजू सिंह समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
मीडिया से बातचीत करते हुए आनंद मोहन सिंह ने कहा कि झारखंड का गठन सिर्फ बिहार से अलग करके कर दिया गया, लेकिन राज्य के समग्र विकास के लिए कोई ठोस और दीर्घकालिक व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने कहा कि यदि झारखंड राज्य का गठन वास्तव में आदिवासी हितों और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाता, तो इसमें पश्चिम बंगाल और ओडिशा के आदिवासी बहुल इलाकों को भी शामिल किया जाना चाहिए था। उनके अनुसार, इन क्षेत्रों को मिलाकर एक “ग्रेटर झारखंड” का गठन अधिक तार्किक और प्रभावी होता।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अलग राज्य बनने के बाद झारखंड को अपेक्षित राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक लाभ नहीं मिल पाए। राज्य आज भी विकास की कमी, बेरोजगारी, पलायन और प्रशासनिक चुनौतियों जैसी कई बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। आनंद मोहन सिंह ने कहा कि देश में खनिज और मिनरल्स की दृष्टि से झारखंड नंबर वन है, इसके बावजूद यहां विकास का वह स्तर नहीं दिखता जिसकी उम्मीद की गई थी। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि झारखंड को आज देश के पांच प्रमुख और विकसित राज्यों या शहरों में गिना जाना चाहिए था, लेकिन यह लक्ष्य अब तक हासिल नहीं हो पाया।
आनंद मोहन सिंह के इस बयान के बाद झारखंड और बिहार समेत राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक दलों, आदिवासी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रियाएं आने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल, इस बयान ने एक बार फिर झारखंड राज्य के गठन, उसकी सीमाओं और विकास मॉडल को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।
