राँची:- झारखंड में समस्त घासी समाज ने अनुसूचित जनजाति का दर्जा पुनः बहाल करने की जोरदार मांग उठाई है। इस संबंध में घासी समाज युवा कल्याण संगठन, झारखंड प्रदेश कमेटी ने कहा है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया, तो समाज सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
संगठन के युवा अध्यक्ष टाइगर संदीप नायक और मुकेश कुमार नायक ने कहा कि घासी जाति ऐतिहासिक रूप से आदिवासी समाज का हिस्सा रही है। वर्ष 1931 से पहले घासी समुदाय को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया गया था, लेकिन स्वतंत्रता के बाद 1950 की अधिसूचना में बिना किसी स्पष्ट कारण के इस समाज को अनुसूचित जाति की सूची में डाल दिया गया, जो घासी समाज के साथ घोर अन्याय है।





मुकेश नायक ने बताया कि घासी समाज झारखंड का मूलवासी समुदाय है, जिसकी अपनी विशिष्ट परंपराएं, संस्कार और संस्कृति रही है। उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति आज भी बेहद पिछड़ी हुई है। उन्होंने कहा हमारे समाज के रीति-रिवाज मुंडा, उरांव, संथाल और खड़िया की तरह ही जनजातीय परंपराओं से जुड़े हैं। भूमि, उत्तराधिकार और पारिवारिक परंपराओं में भी हम हमेशा से आदिवासी ढांचे का हिस्सा रहे हैं। लेकिन अनुसूचित जाति में शामिल करने से समाज को शिक्षा, राजनीति और रोज़गार के क्षेत्र में निरंतर उपेक्षा झेलनी पड़ रही है।
संगठन ने भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1865 का हवाला देते हुए कहा कि ब्रिटिश शासनकाल में ही घासी समाज को आदिवासी मानते हुए अधिनियम की कई धाराओं से छूट दी गई थी। इसके बावजूद स्वतंत्र भारत में घासी समाज को आदिवासी से हटाकर अनुसूचित जाति की श्रेणी में डालना ऐतिहासिक भूल है।
*अन्य राज्यों में घासी को आदिवासी का हैं दर्जा*
अन्य राज्यों में घासी जाती आदिवासी हैं, राजस्थान, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, असम में घासी आदिवासी की दर्जा में हैं। लेकिन बिहार राज्य के समय से लंबे समय से घासी समाज अपनी मांग कर रहे।
इस आंदोलन को पद्मश्री मुकुंद नायक और पद्मश्री महावीर नायक का भी समर्थन मिला है। उन्होंने कहा जिस तरह भोक्ता समाज को पहले अनुसूचित जाति से निकालकर पुनः अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया गया, उसी तर्ज पर घासी समाज को भी तत्काल आदिवासी सूची में शामिल किया जाए। अन्यथा हमें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार की होगी। घासी समाज ने साफ संकेत दिया है कि यदि जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे और इसे राज्यव्यापी रूप देंगे।
