राँची:- महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग, झारखंड महिला विकास समिति एवं समाज कल्याण निदेशालय के संयुक्त तत्वावधान में न्यायिक अकादमी, रांची में “बाल विवाह मुक्त झारखंड” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला में सभी सीडीपीओ और डीएसपीओ को बाल विवाह निषेध अधिकारी (CMPO) के रूप में प्रशिक्षित किया गया। यह झारखंड में पहली बार हुआ है। प्रशिक्षण का उद्देश्य बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 एवं राज्य नियमावली 2015 के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देना तथा राज्य कार्ययोजना 2025-2030 की शुरुआत करना था।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मुख्य सचिव श्रीमती वंदना दादी रहीं। उन्होंने कहा कि 79 वर्ष की आज़ादी के बाद भी बाल विवाह पर चर्चा होना चिंता का विषय है। उन्होंने अधिकारियों, मीडिया और नागरिक समाज संगठनों से बाल विवाह रोकथाम में साझेदारी करने का आह्वान किया।
NFHS-5 रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में बाल विवाह की दर 32.2% है, जबकि राष्ट्रीय औसत 23% है। राज्य के कई जिलों में यह समस्या और भी गंभीर है।
कार्यशाला में UNICEF, ICRW, C3, AVA, YUVA सहित कई संस्थाओं ने सहयोग दिया। कार्यक्रम के दौरान 10 किशोरियों को बाल विवाह रोकने के उनके प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया।
इस कार्यशाला में 34 CDPO, 9 DSPO, 5 CWC, 19 DLSA, 14 विभागीय प्रतिनिधि, 39 NGOs/सिविल सोसायटी और 14 मीडिया प्रतिनिधि शामिल हुए।
कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों ने “बाल विवाह मुक्त झारखंड” बनाने के संकल्प के साथ राज्य कार्ययोजना पर चर्चा की।
