9 साल से झारखंड में J-TET परीक्षा लंबित, 5 लाख प्रशिक्षित अभ्यर्थी आंदोलन को मजबूर – 26 अगस्त को विधानसभा से कूटे मैदान तक पैदल मार्च

The Ranchi News
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राँची:- आज का प्रेस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य यह है कि झारखंड राज्य में लगभग 5 लाख अभ्यर्थी बीएड डीएलएड 2016 के बाद से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद भी झारखंड टेट परीक्षा का आयोजन होने के आश में बैठे हैं जिसमें से हमारे बहुत साथी का उम्र सीमा भी खत्म हो गए बहुतों का उम्र सीमा अंतिम कगार पर है और कुछ लोगों ने बहुत आशा लगाने के बाद यह सोच कर पढ़ाई लिखाई छोड़ दिए कि अब सच में झारखंड सरकार जेटेट परीक्षा का आयोजन नहीं करवा पाएगी। हम बतला देना चाहता हूं कि झारखंड से बने लगभग 25 साल हो चले पर झारखंड में सिर्फ़ 2 बार जेटेट परीक्षा का आयोजन किया जा सका है एक 2013 में और दूसरा नवंबर 2016 में ।

2016 के बाद से 9 साल में झारखंड में 4 मुख्यमंत्री सहित 3 मुख्यमंत्री चेहरे बदल गए, 4 महामहिम राज्यपाल बदल गए, 5 शिक्षा मंत्री बदल गए , दो दो शिक्षा मंत्री इस दुनिया को अलविदा भी कह दिए फिर भी जेटेट परीक्षा का आयोजित नहीं हो पाई जबकि पिछले साल अगस्त 2024 में जेटेट का फॉर्म भी भरवाएं भी गए थे जिसमें लगभग 3.5 लाख अभ्यर्थियों ने फॉर्म भी भरे थे और सरकार को लगभग 38 करोड़ राजस्व भी प्राप्त हुई। पर जब झारखंड एकेडमिक काउंसिल के द्वारा गलत सिलेबस बनाकर छात्रों को थोप दिए गए तो छात्रों के द्वारा इसका विरोध किए गए तो सरकार के द्वारा अधिसूचना को वापस ले लिए गए। उसके तपश्चात अबतक न छात्रों से दुबारा फॉर्म भराए गए न हीं नियमावली बनाकर दिए गए न हीं सिलेबस दिए गए और न हीं परीक्षा का आयोजित किया गया।जिसके विरोध में प्रशिक्षित छात्रों के द्वारा सभी जिलों में इसका विरोध किया गया है उसी के विरोध में 26 अगस्त को पुराना विधानसभा से लेकर कूटे मैदान तक पैदल मार्च सह शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन रखा गया है जिसमें सभी प्रशिक्षित शिक्षकों,छात्र संगठन, शिक्षक गण, अभिभावक गण, सामाजिक संगठन से आग्रह है कि मेरे इस लड़ाई में आप सभी बढ़ चढ़ कर भाग ले और सरकार को आइना दिखाने का काम करें अन्यथा ये सरकार खास कर हमेशा से प्रशिक्षित शिक्षकों को अनदेखा करते आए हैं जिससे आप सभी देख सकते हैं कि झारखंड के सभी सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की अपार कमी है यहां तक कि हजारों विद्यालय में बिना शिक्षक के बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं जो कि अनुचित है सरकार के साथ शिक्षा विभाग को सैकड़ों बार संज्ञान में भी दिए गए पर हमारी मांगों पर हमेशा से अनसुनी और उदासीन रवैया रही।

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